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Monday, March 14, 2011

ब्लाग पर शोध और ब्लागरों को एकजुट करने को भी हो पुरस्कार

-डॉ. अशोक कुमार मिश्र
ब्लाग के संदर्भ में इधर एक अच्छी बात हुई है कि इसके विकास में बेहतर योगदान देने वालों को पुरस्कृत भी किया जाने लगा है। इस बहाने लोगों को प्रोत्साहित करके ब्लाग की लोकप्रियता और महत्ता बढ़ाई जा सकती है। एक बार मशहूर साहित्यकार गिरिराज किशोर से मैने पूछा था पुरस्कारों की क्या महत्ता है? उन्होंने जवाब दिया जैसे लोग चले जा रहे हों और हम किसी पर टार्च से रोशनी डाल दें। पुरस्कृत करके ब्लागरों की रचनाधर्मिता को आलोकित करने के प्रयासों की निसंदेह प्रशंसा की जानी चाहिए और इसे किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है, इस पर भी मंथन चलते रहना चाहिए। ब्लागरों के सम्मेलन हो रहे हैं, पुरस्कार वितरित किए जा रहे हैं, इससे कई नई संभवनाएं जागृत हो रही हैं।
कोई भी सृजनशीलता तब महत्वपूर्ण हो जाती है जब नई पीढ़ी उसके विषय में पढ़े और वह रोजगार से जुड़ जाए। इसीलिए विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में जो विषय शामिल हैं, वह सहजता से लोकप्रिय हो जाते हैं। कई नए क्षेत्रों में शोधकार्य भी चलते रहते हैं। ब्लाग पर भी पिछले वर्ष कई शोधपत्र लिखे गए जिनका प्रकाशन भी हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि जनसंचार के कुछ पाठ्यक्रमों में ब्लाग को जनसंचार के नए माध्यम के रूप में पढ़ाया जाने लगा। ब्लाग पर शोधकार्य होने से इसकी महत्ता में श्रीवृद्धि भी हुई है। इस कार्य और परंपरा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए लेकिन ब्लाग से जुड़े पुरस्कारों की सूची में शोधकार्य को पुरस्कृत करने की ओर ध्यान नहीं गया है।
इसी तरह ऐसे लोग जिन्होंने ब्लागरों को एकजुट किया, विचार मंथन के लिए मंच प्रदान किया और उसकी गरिमा बढ़ाई, उन्हें भी पुरस्कृत किया जाना चाहिए। यह अलग बात है कि उन्होंने यह कार्य किसी पुरस्कार के लिए नहीं किया। ब्लाग के प्रति समर्पण भाव ही उनके कार्य के पीछे था लेकिन उन्हें पुरस्कृत करकेउनके काम को रेखांकित किया जाना चाहिए।
(फोटो गूगल सर्च से साभार)

Monday, January 17, 2011

विश्वविद्यालयों में बहने लगी ब्लाग की बयार

डॉ. अशोक कुमार मिश्र
पिछले दो वर्षों के दौरान ब्लाग को अकादमिक क्षेत्रों में जिस गंभीरता से लिया जा रहा है, वह हिंदी ब्लागिंग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने में समर्थ है। पहले इलाहाबाद में ब्लागर सम्मेलन, वर्धा में ब्लागिंग की आचार संहिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, दिल्ली ब्लागर मीट, खटीमा में ब्लागर संगोष्ठी, इंदौर की गायत्री शर्मा और धर्मशाला के केवलराम का हिंदी ब्लाग पर पीएचडी की उपाधि केलिए शोध करना इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि हिंदी ब्लाग अब इस स्थिति में पहुंच चुका है कि उस पर शोध कर निष्कर्ष निकाले जाएं ताकि भविष्य की दिशा और संभावनाएं रेखांकित की जा सकें। खुद मैने महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र में ०९-१० अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में ब्लागरी में नैतिकता का प्रश्न और आचार संहिता की परिकल्पना, हरियाणा के पलवल स्थित गोस्वामी गणेशदत्त सनातन धर्म स्नातकोत्तर महाविद्यालय, में २२-२३ अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में ब्लाग का विधायी स्वरूप और उसकी भाषा संरचना, मुरादादाबाद स्थित महाराजा हरिश्चंद्र कॉलेज में १४-१५ नवंबर को आयोजित राष्टï्रीय हिंदी संगोष्ठी में सूचना तकनीक और हिंदी पत्रकारिता विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया जिसमें ब्लाग पर वैचारिक मंथन किया गया। इसके साथ ही ब्लाग पर दो अन्य शोधपत्र मैने लिखे जो यमुनानगर और दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत किए जाने हैं। इसी हफ्ते मुझे सूचना मिली कि कल्याण में अगले माह ब्लाग पर राष्ट्रीय संगोष्ठी होने जा रही है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बह रही ब्लाग की बयार उम्मीदों के नए झोंके लेकर आएगी, ऐसा विश्वास है। रोजाना हिंदी चिट्ठे बढ़ रहे हैं, यह भी सुखद संकेत हैं। ब्लाग पर प्रस्तुत लेखन में गुणवत्ता का समावेश करना समय की सबसे बड़ी चुनौती है।
इस बीच ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत जैसे एग्रीगेटरों का बंद होना कुछ चिंतित करता है। एग्रीगेटर ब्लाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और वजह चाहे कुछ भी हो लेकिन इनका बंद होना तकलीफदेह है। ब्लाग को बेहतर और बहुआयामी बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए तभी इसकी सार्थकता है।

Tuesday, November 16, 2010

ब्लाग ने आम आदमी को भी बना दिया ताकतवर पत्रकार

-डॉ. अशोक कुमार मिश्र
महाराजा हश्चिंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुरादाबाद में १४-१५ नवंबर को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संपोषित राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी में डॉ. अशोक कुमार मिश्र ने सूचना तकनीक और हिंदी पत्रकारिता विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। शोधपत्र में उन्होंने इस तथ्य को भी स्थापित किया कि सूचना तकनीक की देन ब्लाग ने आम आदमी को पत्रकारिता की ताकत दे दी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में सूचना तकनीक ने हिंदी पत्रकारिता को बहुत गहराई से प्रभावित करते हुए जनसंचार माध्यमों के विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. मिश्र ने संगोष्ठी में कहा विज्ञान, कला और शिल्प से संवारा गया मीडिया का आधुनिक वैश्विक चेहरा न केवल जनता को लुभा रहा है बल्कि उसके लिए बहुउपयोगी बनकर जीवन व्यवहार में कई प्रकार के परिवर्तनों का कारक बन गया है। उन्होंने कहा कि सूचना तकनीक के उन्नत उपकरणों के कारण जनसंचार माध्यमों से समाचार तीव्र गति से बड़े आकर्षक कलेवर में जनता तक पहुंच जाते हैं। सूचना तकनीक ने न केवल समाचार संकलन, प्रेषण बल्कि उनके प्रस्तुतीकरण में भी सकारात्मक क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिया है। केवल कलम केसहारे पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों के स्थान पर अब सूचना तकनीक से लैस ऐसे संवाददाताओं का वर्चस्व है जो लैपटॉप, मोबाइल और इंटरनेट का भरपूर प्रयोग करते हुए दूरस्थ स्थलों से भी बहुत शीघ्रता से समाचार जनता को उपलब्ध करा देते हैं। पहले जहां पत्रकारिता के रूप में मुद्रित माध्यम की देन समाचार पत्र और पत्रिकाएं ही थीं वहीं आज सूचना तकनीक के चलते टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट, मोबाइल औ वीडियो मैगजीन भी उलब्ध हैं जिन्होंने हिंदी पत्रकारिता को अत्यंत विश्वसनीय, तीव्रगामी, उपयोगी और वैश्विक बना दिया है। आधुनिक युग में व्यक्ति चाहे शिक्षित हो अथवा अनपढ़, शहर में हो अथवा सुदूर ग्रामीण अंचल में, वह सूचनाओं से वंचित नहीं है। सूचना के विस्फोट से अब कोई आदमी अछूता नहीं है। यह अलग बात है कि इसके कुछ नकारात्मक पक्ष भी हैं। इस राष्ट्रीय गोष्ठी के संयोजक डॉ. मुकेश चंद्र गुप्ता रहे।
(फोटो गूगल सर्च से साभार)

Sunday, October 31, 2010

पलवल में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में ब्लाग पर शोधपत्र

-डॉ. अशोक कुमार मिश्र
हिंदी नवलेखन की विधाओं को विस्तार देने में ब्लाग एक महत्वपूर्ण मंच की भूमिका निभा रहा है। इसीलिए अकादमिक क्षेत्र में ब्लाग को गंभीरता से लिया जा रहा है। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में ०९-१० अक्टूबर को ब्लागिंग की आचार संहिता विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें ब्लाग के विविध पक्षों पर गंभीरता से मंथन किया गया। इसके बाद २२-२३ अक्टूबर को हरियाणा के पलवल स्थित गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म महाविद्यालय में बाजारवाद और आधुनिक हिंदी साहित्य विषय पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संपोषित राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में हिंदी में नवलेखन के संदर्भ में ब्लाग पर भी वैचारिक विश्लेषण किया गया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में मेरठ के डॉ. अशोक कुमार मिश्र ने ब्लाग का विधायी स्वरूप और उसकी भाषा संरचना विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। शोधपत्र में ब्लाग की प्रविधि केसंदर्भ में ब्लाग बनाने की सुविधा देने वाली वेबसाइट, एग्रीगेटर, यूनीकोड आदि के विषय में जानकारी देते हुए तथ्यपरक ढंग से स्थापित किया कि विगत कुछ वर्षों के मध्य ही विकसित हुई अंतर्जाल की इस आभासी दुनिया में आज नित नई साहित्यिक कृतियों का सृजन हो रहा है। ब्लाग पर रोजना समसामयिक विषयों पर आधारित विचारपूर्ण आलेख, कविताएं, कहानियां, लघुकथाएं, सूचनापरक रिपोर्ट, यात्रावृतांत, संस्मरण आदि लिखे जा रहे हैं। साहित्य की कोई विधा ऐसी नहीं है, जो ब्लाग के माध्यम से समृद्ध नहीं हो रही है। ब्लाग की भाषा संरचना के विषय में शोधपत्र में बताया गया कि परंपरागत साहित्यिक भाषा के स्थान पर जनभाषा की प्रकृति को धारण किए हुए चिट्ठों में दूसरी भाषाओं केशब्दों को आत्मसात करने की अद्भुत क्षमता दिखाई देती है। यही कारण है कि ब्लाग की भाषा में प्रयुक्त हो रही नित नवीन शब्दावली हिंदी भाषा और साहित्य को समृद्ध कर रही है। संयोजक डॉ. केशवदेव शर्मा ने संगोष्ठी का संचालन किया।
(फोटो गूगल सर्च से साभार)

Sunday, October 24, 2010

ब्लाग में आचार संहिता नहीं, स्वअनुशासन होना चाहिए



-डॉ. अशोक कुमार मिश्र
महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में ०९-१० अक्टूबर को ब्लागिंग की आचार संहिता विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी कई मायनों में बड़ी महत्वपूर्ण रही। आज जब पूरी दुनिया में साहित्यिक और पत्रकारिता संबंधी विधाओं के उन्नयन में ब्लाग एक महत्वपूर्ण मंच की भूमिका निभा रहा है, तो यह जरूरी हो जाता है कि उस पर प्रकाशित सामग्री का विविधि दृष्टिकोण से विश्लेषण किया जाए। संगोष्ठी के संयोजक विश्वविद्यालय केआंतरिक सम्परीक्षा अधिकारी सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने इस महत्वपूर्ण पक्ष को समझकर वर्धा में ब्लागरों को एकजुट किया। इस सम्मेलन के माध्यम से कई सवाल उठे और उनके जवाब तलाशे गए। संगोष्ठी का प्रारंभ करते हुए श्री त्रिपाठी ने ब्लाग की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला और आचार संहिता के प्रश्न को उठाया। प्रति कुलपति प्रो. अरविंदाक्षन ने भी संगोष्ठी की उपादेयता प्रतिपादित की। उद्घाटन करते हुए कुलपति व प्रसिद्ध साहित्यकार विभूति नारायण राय ने सामयिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्लाग को बहुत गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। ब्लाग के माध्यम से उपलब्ध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहीं स्वच्छंदता में न परिवर्तित हो जाए, इसकेप्रति सचेत रहना होगा। उन्होंने कहा कि ब्लागर अपनी लक्ष्मण रेखा का स्वयं निर्धारण करें।
वस्तुत: अधिकतर ब्लागर इसी बात केपक्ष में दिखाई दिए। उनकी मान्यता थी कि ब्लाग पर यदि आचार संहिता का शिकंजा कस दिया जाएगा तो उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पक्ष समाप्त हो जाएगा जो कि उसकी सबसे बड़ी विशेषता है। कुछ चिट्ठाकारों की मान्यता थी कि ब्लाग पर प्रकाशित रचनाओं का यदि नियमन किया जाएगा तो इससे इसके सामाजिक सरोकारों और सार्थकता में वृद्धि हो जाएगी। बाद में, साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने ब्लागर केनिरंकुश होने से उत्पन्न खतरों से सचेत किया और संगोष्ठी के विषय की सार्थकता को स्थापित करते हुए स्पष्ट किया कि ब्लागरों के लिए भी निश्चित रूप से कुछ नियम कायदे होने चाहिए।
प्रतिष्ठित कवि आलोक धन्वा ने कहा कि ब्लाग विस्मयकारी करने वाला है। उनके लिए शब्दों का यह अद्भुत संसार है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर बहुत कठिनाइयों भरा है जहां लोकतांत्रिक मूल्यों का निरंतर लोप होता जा रहा है। ऐसे में ब्लाग पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सदुपयोग करते हुए विचार तत्वों को विस्तार दिया जा सकता है। उन्होंने कहा ब्लाग जगत में पाखंड नहीं है, जो बहुत अच्छी बात है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे हैदराबाद से आए प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि ब्लाग पर प्रस्तुत शब्द संसार को आभासी नहीं वास्तविकता से जोड़कर ही देखा जाना चाहिए। इसलिए इसमें नैतिकता के प्रश्न पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने ब्लाग पर पनप रही दुष्प्रवृत्तियों को आड़े हाथ लेते हुए आचार संहिता की वकालत की।
लंदन से आई कविता वाचक्नवी ने ब्लागिंग की आचार संहिता का समर्थन करते हुए लेखन में संयम बरतने की बात कही। उन्होंने कहा लेखन के माध्यम से सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए निरंकुश आचरण नहीं किया जाना चाहिए। कथाकार डॉ. अजित गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि ब्लागर एक पंचायत बनाकर लेखकीय नियमन का निर्धारण करें।
कानपुर से आए अनूप शुक्ल, दिल्ली के यशवंत सिंह और हर्षवर्धन ने ब्लाग में आचार संहिता की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इससे ब्लाग की मौलिक प्रवृत्ति ही नष्ट हो जाएगी। इसकेबाद अहमदाबाद के संजय बेगाणी और दिल्ली के शैलेश भारतवासी ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को ब्लाग बनाने का प्रशिक्षण दिया। जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार राय अंकित ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

संगोष्ठी
का दूसरा दिन कई चिंतनपरक आयामों से गुजरा। सभी ब्लागरों के चार समूह बनाकर विविध विषयों पर विचार मंथन किया गया और उसके निष्कर्षों को समूह प्रतिनिधि ने मंच से प्रस्तुत किया। ब्लागिंग में नैतिकता व सभ्याचरण, हिंदी ब्लाग और उद्यमिता, आचार संहिता क्यों और किसके लिए, हिंदी ब्लाग और सामाजिक सरोकार विषयों पर गहन मंथन किया गया। चार ब्लागरों के अध्ययन पत्रों का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। डॉ. अशोक कुमार मिश्र ने ब्लागरी में नैतिकता का प्रश्न और आचार संहिता की परिकल्पना विषय पर प्रस्तुत अपने अध्ययन पत्र में उल्लेख किया कि ब्लाग में स्वअनुशासन का होना बहुत जरूरी है। अनुशासन के दायरे में रहकर ही श्रेष्ठ लेखन संभव है। ब्लाग में नैतिकता के प्रश्न का वैचारिक विश्लेषण करते हुए कहा जा सकता है कि ब्लाग में आचार संहिता की परिकल्पना के पीछे चिट्ठाकारों में स्वअनुशासन की भावना को ही विकसित करना है। लखनऊ के रवींद्र प्रभात, ब्लाग पर पीएचडी कर रही इंदौर से आई गायत्री शर्मा, दिल्ली के अविनाश वाचस्पति ने भी अध्ययनपत्र प्रस्तुत किए। उज्जैन से आए सुरेश चिपलूनकर, लखनऊ के जाकिर अली रजनीश और बंगलौर से आए प्रवीण पांडे ने ब्लाग लेखन में शाब्दिक शालीनता बरतने, सार्थक टिप्पणियां करने, ब्लाग के माध्यम से समसामयिक प्रश्नों पर विचार करने और सामाजिक सरोकारों से जोडऩे पर जोर दिया। साहित्यकार राजकिशोर, प्रियंकर पालीवाल, महेश सिन्हा, जयराम झा, विवेक सिंह, संजीत त्रिपाठी, श्रीमती अनीता कुमार, रचना त्रिपाठी, विनोद शुक्ला की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

Monday, August 10, 2009

रचनात्मकता को विस्तार देते ब्लाग

-डॉ. अशोक प्रियरंजन
चंडीगढ की डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी ने ब्लाग का जिस तरह से उपयोग करने की योजना बनाई है, वह दूसरे विद्यालयों के लिए अनुकरणीय हो सकता है । कमेटी ने तय किया है कि अब शिक्षक क्लास में तो पढ़ाएंगे ही, साथ ही रोजाना ब्लाग के माध्यम से छात्रों केसंपर्क में रहेंगे । इससे छुट्टी के बाद भी छात्रों की हर समस्या चुटकियों में हल होगी और बच्चों के मन से परीक्षा का डर भी खत्म होगा । ब्लाग जहां बच्चों को कोचिंग देगा वहीं उन्हें शिक्षकों का उचित मार्गदर्शन भी मिलेगा । शिक्षक भावनात्मक रूप से भी बच्चों से जुड़ सकेंगें। इससे बच्चों में निराशा का भाव पैदा नहीं होगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा ।
दरअसल, इंटरनेट की उपलब्धि से उपजे ब्लाग ने रचनात्मकता के विस्तार की अपार संभावनाओं को जागृत किया है । ब्लाग अर्थात बेब लॉग को इंटरनेट पर लिखी डायरी के तौर पर समझा जा सकता है। यह व्यक्ति के निजी विचारों को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है। अनेक बेबसाइट निशुल्क ब्लाग बनाने और उसे संवारने की सुविधा उपलब्ध कराती हैं। ब्लाग में व्यक्ति स्वयं लेखक, प्रकाशक, संपादक और प्रसारक है। अपनी लिखी सामग्री को वह एग्रीगेटर्स के माध्यम से पूरी दुुनिया तक पहुंचाता है। एग्रीगेटर ब्लाग की जानकारी देने का प्लेटफार्म है। ब्लाग की खासियत यह भी है कि इसे किसी भी समय और कहीं भी सचित्र पब्लिश किया जा सकता है और पढ़ा जा सकता है । पाठक को इसमें कमेंट करने की सुविधा होती है । कमेंट करने वाले का फोटो भी प्रकाशित होता है । यह कमेंट ब्लाग लेखक के लिए प्रोत्साहन का माध्यम बनते हैं और उसे कुछ और लिखने की प्रेरणा देेते हैं।
ब्लाग ने पूरी दुनिया के रचनाकारों को एक सूत्र में बांधने का काम किया है। इसके माध्यम से उन लोगों को भी पहचान मिली है जो किन्हीं कारणोंवश अपनी रचनात्मकता को जनता तक नहीं पहुंचा पाए। रचनात्मकता को विस्तार देने, उसे निखारने और व्यापक फलक पर प्रदर्शित करने का यह माध्यम निसंदेह अनेक प्रतिभाओं को सामने भी लाया है ।
विभिन्न क्षेत्रों के जुड़े व्यक्ति अपने दृष्टिकोण से इसका उपयोग कर रहे हैं । पिछले कुछ समय से हिंदीभाषी क्षेत्रों में भी ब्लाग की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है हालांकि यह संख्या में अंग्रेजी की अपेक्षा काफी कम हंै। अंग्रेजी में पूरी दुनिया में पांच करोड से ज्यादा ब्लाग हैं जबकि हिंदी में अभी लगभग दस हजार ही ब्लाग हैं । रोजाना लगभग २०-३० नए ब्लाग हिंदी के बन रहे हैं। युवाओं में ब्लाग बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। साथ ही साहित्य, मीडिया, चिकित्सा, कला समेत विविध क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिभाएं ब्लाग पर अपनी रचनात्मकता के आकार दे रही हैं । बहुत सुंदर और सार्थक चित्रों का उपयोग ब्लाग को मोहक बना रहा है।
साहित्यकारों की समग्र रचनाएं भी ब्लाग पर उपलब्ध हैं । गीत, गजल, कविता, कहानी, लघुकथा लेखन भी ब्लाग पर खूब हो रहा है । मीडिया पर मंथन और विश्लेषण का काम भी ब्लाग जगत में चलता है । कोई ब्लागर विधि संबंधी जानकारी दे रहा है तो कोई चिकित्सा संबंधी समस्याओं के निदान बता रहा है । ज्वलंत विषयों पर समसामयिक टिप्पणी भी ब्लाग पर मौैजूद हैं । युवाओं की चिंताओं और समस्याओं को भी अभिव्यक्त किया जा रहा है ।
निजी भावनाओं को कलात्मक अभिव्यक्ति भी ब्लाग पर मिल रही है । भावनात्मक संबंधों का अनूठा संसार ब्लाग पर बन रहा है। हजारों मील दूर बैठे ब्लागर परस्पर भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं । हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार का काम भी इस विधा के माध्यम से हो रहा है । देश की सीमा ब्लाग लेखन में बाधा नहीं बनती । यही वजह है कि अनेक नामचीन लोग अब ब्लाग लेखन में रुचि ले रहे हैं । पिछले लोकसभा चुनाव में अनेक प्रत्याशियों ने अपनी बात जनता तक पहुंचाने का माध्यम ब्लाग को भी बनाया ।
वास्तव में ब्लाग का अगर सही दिशा में सार्थक उपयोग किया जाए तो यह ज्ञान के विस्तार, रचनात्मकता की अभिव्यक्ति और अपनी भावनाएं जनमानस तक पहुंचाने का तीव्र और प्रभावशाली माध्यम है । भारत में जिस तरह से कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग बढ़ रहा है, उससे ब्लाग लेखन में अपार संभावनाएं जागृत हो रही हैं। चंडीगढ़ जैसे और भी कई सकारात्मक प्रयोग ब्लाग के माध्यम से संभव होंगे ।
(फोटो गूगल सर्च से साभार)