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Monday, May 25, 2020

राष्ट्रीय, सामाजिक और भाषाई मुद्दों को उठाती पुस्तक


                         

साहित्यकार और पत्रकार डॉ.  अशोक कुमार मिश्रा की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “ राष्ट्रीय, सामाजिक और भाषाई मुद्दे ” में मौजूदा दौर की अनेक समस्याओँ और चुनौतियों को रेखांकित किया गया है । ई कामर्स प्लेटफार्म  एमजान पर बिक्री के लिए उपलब्ध यह पुस्तक देश की उन समस्याओं और चुनौतियों को उठाती है जिनसे आम आदमी के सरोकार जुड़े हैं और जो उन्हें गहराई से प्रभावित करती हैं । मौजूदा दौर में कोराना वायरस महामारी का खतरा लोगों के जीवन पर मंडरा रहा है । इससे उपजी मंदी, बेरोजगारी और आर्थिक संकट ने लोगों की कमर तोड़ दी है । इस बीच आतंकवाद की घटनाएं भी हुईं । बेसिक शिक्षा गुणवत्ता की समस्या से जूझ रही है तो उच्च शिक्षा केंद्रों में होने वाली हिंसक घटनाएं छात्र छात्राओँ की पढ़ाई में बाधा डाल देती हैं । सामाजिक रिश्तों का ताना बाना कमजोर होता जा रहा है । इन्हीं तमाम मुद्दों को पुस्तक में उठाया गया है । पुस्तक समाज के हर आयुवर्ग के लोगों के लिए पठनीय है।


Tuesday, November 4, 2008

आतंकवाद, मंदी और क्षेत्रवाद से उपजा संकट

-डॉ. अशोक प्रियरंजन
आतंकवाद, मंदी और क्षेत्रवाद की समस्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है । पूरी दुनिया सिर्फ मंदी को झेल रही है जबकि भारत के समक्ष इसके साथ ही दो और संकट आतंकवाद और क्षेत्रवाद लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं । आर्थिक संकट के साथ ही जान-माल की हिफाजत का भरोसा भी शिथिल पड रहा है । कब नौकरी पर छंटनी की तलवार लटक जाए, कब कहीं बम विस्फोट हो जाए, कब क्षेत्रवाद का दानव मौत के घाट उतार दे, किसी को पता नहीं । यह हालात अस्थिरता और तनाव की स्थितियां पैदा कर रहे हैं । हर आदमी इन समस्याओं से व्यथित है । पूरे देश में एक अजीब किस्म का खौफ का माहौल बन रहा है जो लोगों को बेचैन किए है । मौजूदा दौर में उपजी समस्याओं पर गंभीर वैचारिक मंथन की जरूरत है ताकि इनका हल निकाला जा सके ।
आतंकवाद की समस्या देश में गंभीर होती जा रही है । दहशतगर्दों ने न जाने कितने घरों के चिराग बुझा दिए हैं और अनेक लोगों को ऐसे जख्म दिए जिनकी टीस वह जिंदगीभर सहने के लिए मजबूर हैं । बीते छह महीने में देश में ६४ सीरियल ब्लास्ट हुए हैं जिनमें २१५ लोग मारे गए और ९०० घायल हो गए । जयपुर, अहमदाबाद, बंगलूरू और दिल्ली के बाद आतंकवादियों ने ३० अक्तूबर को असम को निशाना बनाया । दहशतगर्दों ने गुवाहाटी, कोकराझार, बोंगाइगांव और बरपेटा में भीडभाड़वाले बाजारों में १३ सिलसिलेवार धमाके कर ६१ लोगों को मौत की नींद सुला दिया । विस्फोट में ४७० लोग घायल हुए हैं । वर्चस्व जाहिर करने के लिए अंजाम दी गई इस सनसनीखेज वारदात में शक की सुई हूजी आतंकियों की ओर है।
इस समय पूरी दुनिया एक गंभीर संकट से गुजर रही है । मंदी की मार ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है । मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों के उद्यमी भी अपने यहां नौकरियों में कटौती करने के मजबूर हैं । अमेरिका में मंदी की सुनामी ने जो तबाही मचाई है उससे भारत भी अछूता नहीं है । एसोचेम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सात प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में आगामी १० दिन में २५ फीसदी कर्मचारियों की छंटनी की आशंका है हालांकि बाद में यह रिपोर्ट वापस ले ली गई । बेरोजगारी की समस्या झेल रहे इस देश में मंदी से उपजी बेरोजगारी नई पीढी में हताशा और मायूसी ही लाएगी । कैरियर को लेकर जो सपने उन्होंने देखे हैं, उन पर ग्रहण लगता प्रतीत हो रहा है । ऐसे में उनके समक्ष चुनौतियां और बढ़जाएंगी । जटिल परिस्थितियों में कैरियर को आकार देना और अपने सुखद भविष्य की जमीन तैयार करना निसंदेह आसान काम नहीं है । नई पीढ़ी को एक नए उत्साह और दृढ संकल्पशक्ति के साथ शिक्षा और कैरियर से जुडे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी होगी । अभिभावकों और शिक्षकों को उनका मार्गदर्शन करना होगा ।
मंदी के संकट के संग ही देश में क्षेत्रवाद ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है । पिछले कुछ अरसे से मराठी क्षेत्रवाद के नाम पर मुंबई में जिस तरह उत्तर भारतीयों की हत्या की जा रही है, वह बहुत खतरनाक संकेत हैं । सपनों की नगरी मुंबई में जाने का ख्वाब पूरे देश के लोग देखते हैं । अभिनय, नाटक और विविध क्षेत्रों में अपनी प्रतिभाओं से लोगों को आकर्षित कर रहे लोग मुंबई जाकर नाम और पैसा कमाना चाहते हैं । देश की आर्थिक राजधानी होने के नाते मुंबई में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं । रोजगार की तलाश में बडी संख्या में लोग मुंबई जाते हैं । मुंबई के भी लोग नौकरी अथवा अन्य व्यवसायों को करने के लिए देश के विविध भागों में जाकर अपनी किस्मत चमकाते है ं। देश में रोजगार के लिए अगर क्षेत्रवाद की दीवारें खींच दी जाएंगीं तो लोगों को आजीविका जुटाने में बडी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा । इसलिए क्षेत्रवाद पर अंकुश लगाना जरूरी है।
(इस लेख को अमर उजाला कॉम्पैक्ट मेरठ के ३१ अक्तूबर २००८ के अंक में संपादकीय पृष्ठ पर भी पढा जा सकता है)
(फोटो गूगल सर्च से साभार)