Wednesday, March 6, 2013

महिलाओं की सुरक्षा के हों पुख्ता इंतजाम

-डा. अशोक कुमार मिश्र

पूरी दुनिया में आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह एक दिन एसा होता है जिस दिन पूरी दुनिया में महिलाओं की मौजूदा हालात पर गहन मंथन हो जाता है। अखबारों में लेख छपते हैं, गोष्ठियां होती हैं और कुछ निष्कर्ष भी निकलते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि महिलाएं पहले के मुकाबले मजबूत हुई हैं। 21 वीं सदी के कुल जमा पिछले 12 सालों में जितनी महिलाएं शिक्षिक, इंजीनियर, डाक्टर, बनी, उच्च पदों पर पहुंची और रोजगार के विविध क्षेत्रों में सक्रिय हुईं, वह अद्भुत है। आज महिलाओं ने आईटी, प्रशासन, शिक्षा और विज्ञान जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ाकर पहचान बनाई है। 20 वीं सदी में यह संख्या काफी कम थी। आज महिला शिक्षा का प्रतिशत बढ़ा है। आर्थिक रुप से महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं, यह अच्छे संकेत है। कुछ न कुछ नकारात्मक पक्ष हमेशा रहे हैं, उन्ही को तो ठीक करने के लिए समाज में संघर्ष चलता रहता है, और आगे भी चलता रहेगा। यह भी सच है कि महिलाओं के प्रति अपराध बढ़े हैं, बाजार के गणित के चलते उनके प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है, जिस पर गहनता से विचार करने की जरूरत है। कामकाजी व्यस्तताओं के चलते अब वह घर और परिवार के लिए समय कम दे पाती हैं। मौजूदा हालात में अगर सुरक्षा की बेहतर स्थितियां हों तो महिलाओं को रोजगार के अवसर अधिक मिलेंगे और वह तेजी से आगे बढ़ सकेंगीं।

3 comments:

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सार्थक आलेख,सुरक्षा तो बढ़ना चाहिए.

शालिनी कौशिक said...

.एक एक बात सही कही है आपने आभार सौतेली माँ की ही बुराई :सौतेले बाप का जिक्र नहीं आज की मांग यही मोहपाश को छोड़ सही रास्ता दिखाएँ .

Himanshu Veerwal said...

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