Friday, April 22, 2011

पति-पत्नी के झगड़ों में बच्चों को क्यों दे रहे मौत?

-डॉ. अशोक कुमार मिश्र
मौजूदा दौर में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी बहुत सी घटनाएं हो रही हैं जिनमें पति-पत्नी के झगड़ों में बच्चों को मौत मिल रही है। गृहकलह के चलते पहले बच्चों को मौत की नींद सुलाकर खुद भी आत्महत्या करने की घटनाएं किसी भी संवेदनशील मनुष्य को झकझोर जाती हैं। सहज ही मन में यह सवाल उठता है कि इन निर्दोष मासूम बच्चों का क्या कुसूर था? इन्हें क्यों जिंदगी शुरू होने से पहले ही मौत दे दी गई? चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं? संभवतया बच्चों की परवरिश कौन करेगा, जैसे सवालके चलते ही खुदकुशी से पहले बच्चों को मार डालने की घटनाएं हो रही हैं। पिछले एक हफ्ते में अगर यूपी में ही ऐसी चार घटनाएं हुई हैं तो संख्या निश्चित रूप से पूरे देश के लिए चौंकाने वाली है जिसकी ओर सभी का ध्यान जाना चाहिए। जरा इन घटनाओं पर गौर करें।
२२ अप्रैल को ऐसी ही दो घटनाएं हुईं। गाजीपुर जिले के सैदपुर इलाके में दहेज केे लिए प्रताडि़त किए जाने से तंग आकर एक विवाहिता ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। मामला खानपुर थाना क्षेत्र के रामपुर गांव का है। यहां के निवासी युवक की शादी वर्ष २००६ में वाराणसी के चोलापुर थाना क्षेत्र स्थित नियार गांव की २४ वर्षीया रजनी के साथ हुई थी। शुक्रवार की सुबह रजनी अपने पुत्री खुशी (०३) और पुत्र युवराज (०१) के साथ सिंधौना आई और वाराणसी से औडि़हार जा रही एक यात्री ट्रेन के आगे कूद गई। तीनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हालांकि ससुराल वाले घटना की वजह मामूली पारिवारिक खटपट बता रहे थे, जबकि मृतका के मायके वालों का कहना था कि दहेज में मोटरसाइकिल लाने की मांग को लेकर रजनी को प्रताडि़त किया जा रहा था। इसी कारण वह दोनों बच्चों संग खुुदकुशी करने को मजबूर हुई। मृतका के पिता रामदुलार की ओर से दी गई तहरीर केआधार पर मृतका के पति तथा सास के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
दूसरी घटना बहराइच जिले के तुलसीपुर इलाके की है। यहां शादी के 22 साल बाद एक व्यक्ति ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी रचा ली। पहली पत्नी से छुटकारा पाने के लिए वह अक्सर उसे मारता पीटता। चार बच्चों की मां शकुंतला अपने पति की बेवफाई तो सहन कर गई लेकिन प्रताडऩा बर्दाश्त नहीं कर सकी। उसने पहले अपने बच्चों को जहर मिला कर भोजन खिलाया फिर बाद में वही भोजन खुद भी खा लिया। इलाज के दौरान शकुंतला व उसकी पुत्री उमा देवी (१२) की मौत हो गई। जबकि जबकि तीन बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है। रुपईडीहा पुलिस ने आरोपी पति रामचंदर मिश्रा और उसकी पत्नी ऊषा देवी को गिरफ्तार कर लिया है।
१६ अप्रैल को भी ऐसी ही दो घटनाएं हुईं। मेरठ जिले के परीक्षितगढ़ कसबे में एक महिला ने अपने दो मासूमों को फांसी पर लटका कर खुद भी फांसी लगा ली। गंधार गेट पर रहने वाले प्रवीण की बीवी कविता ने तीन साल के बेटे आदित्य और एक साल की बेटी भावना को छत के कुंडे पर लटका दिया। बाद में खुद भी पंखे से लटककर जान दे दी। पड़ोसियों ने कमरे का दरवाजा तोडक़र शवों को निकाला।
इसी दिन सीतापुर के तालगांव थाना क्षेत्र में पत्नी से विवाद के बाद एक युवक ने अपनी दो बेटियों के साथ शारदा सहायक नहर में छलांग लगा दी। तीनों नहर में बह गए। बहादुरापुर मजरा कल्याणपुर निवासी शमशाद (२५) पुत्र अख्तर अपनी पत्नी रोजनी, दो साल की बेटी सोनी व छह माह की बेटी मोनी के साथ बस से बिसवां जा रहा था। वह तालगांव क्षेत्र के जीतामऊ चौराहे पर बस से उतर गया। इस बीच शमशाद व उसकी पत्नी में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद के बाद शमशाद की पत्नी वापस घर चली गई। इससे नाराज शमशाद ने अपनी दोनों बेटियों के साथ मोहम्मदीपुर गांव के पास नहर में छलांग लगा दी। बिसवां क्षेत्र में बड़ी बेटी सोनी की लाश बरामद हो गई है।
ये घटनाएं इस बात की ओर संकेत कर रही हैं कि पति-पत्नी की कलह के चलते न केवल परिवार बिखर रहे हैं बल्कि बहुत बड़ी संख्या में बच्चों को जिंदगी से मुंह मोडऩे को मजबूर कर दिया जाता है? यह और कोई नहीं करता बल्कि उनके माता-पिता ही कर रहे हैं। सवाल पैदा होता है कि क्या जन्म देने वाले को यह हक है कि वह मौत भी दे दे? यह भी एक बड़ा सवाल है कि कैसे ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जाए। इस गंभीर मुद्दे पर समाजशास्त्रियों को भी विचार करने की जरूरत है। किसी भी तरह से बढ़ती हुई ऐसी घटनाओं पर तुरंत रोक लगाना जरूरी है।
( फोटो गूगल सर्च से साभार )

24 comments:

शारदा अरोरा said...

ये एक गंभीर समस्या है , कारण वही है कि समस्या तो भूत जैसी लगती है निदान सिर्फ भागने में नजर आता है , सामना करके ,प्यार सब्र के साथ तो बड़े बड़ों का दिल जीता जा सकता है , spirituality is missing ,

DesiGujju said...

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Patali-The-Village said...

यह एक गंभीर समस्या है माँ बाप को इस तरफ ध्यान देने की जरुरत है| धन्यवाद|

prerna argal said...
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prerna argal said...

बिलकुल सही समस्या पर लिखी एक अदभुत रचना /बहुत-बहुत बधाई /

please visit my blog www.prernaargal.blogspot.com leave the comments also.thanks

रेखा said...

आज कल हर समस्या का हल लोग तुरंत चाहते हैं और आक्रोश में वे अपना और अपने परिवार का नाश कर लेते है ....
मेरा ब्लॉग भी देखे
http://achal-anupam.blogspot.com/

yuvraj indian said...

AApka ae sujjestion bahut acha hai gi aaj inki nitant aavshyakata hai

yuvraj indian said...

Aapka ye sujjestion bahut acha hai ji kyonki aaj kal ye mahatvapurn samsya ban gayi aur is balbacho ko yani yuth india ko svara k aage leke aage hame jana hai

Madhu Tripathi said...

जी बिलकुल आपने इस गंभीर समस्या की और ध्यान खीचा है
ये जिसका एक तरफ निदान दिया जाता है तो दूसरी तरफ बढती जाती है
kavyachitra.blogspot.com
madhu tripathi
--
MM

prritiy---------sneh said...

sahi paristhiti ko batata hai aapka lekh.
aajkal logon mein sehanshakti ki bahut kami haiisliye chhoti-chhoti baaton ko sehan nahi kar pate aur ye kadam utha lete hain.


shubhkamnayen

sureshTamrakar said...

रोक तो लगना चाहिए, लेकिन लगे कैसे। सामाजिक स्थितियाँ ही बदल गई हैं। संतोष, सहिष्णुता जैसे गुणों का लोप हो चुका है। ऐसी हालत में यह तो होना ही है।

Madhu Tripathi said...

ashok ji
yeh samsya aam ke saath saath khas bhi hai

madhu tripathi
tripathi873@gmail.com
http://kavyachitra.blogspot.com

Manisha said...

humare desh me ek baar kanya dan karke ma baap bhi to beti se kehte hai tumhara ghar wahi hai ab jaise raho...mujhe in deaths ke liye parents bhi equally responsible lagte hain, agar beti dukhi hai to kyon nahi uska sambak bante, kyon nahi use mazboot banate, kyon nahi wapis le aate, ek sahara chahiye hota hai jeene ke liye aur apne hi parents ye nahi kar paate. Kitni baar abuse sehne ko girls ko wapis bhej dete hain. tab akeli padi ladki kare to kare kya

avanti singh said...

bahut hi gambhir smsaya ki tarh sab ka dhyaan khichti bhuee post.....aabhaar

यशवन्त माथुर said...

कल 01/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सार्थक मुद्दा उठाया है ... विचारणीय

सदा said...

बिल्‍कुल सही कहा है ... सार्थकता लिए हुए सटीक प्रस्‍तुति।

Ravi kant yadav justiceleague said...

कृपया मेरे ब्लॉग पर भी आए

usha.digitalinfo said...
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usha.digitalinfo said...
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