Saturday, April 16, 2011

कब तक धोखे और अत्याचार का शिकार होंगी महिलाएं


-डॉ. अशोक कुमार मिश्र
पूरी दुनिया में जब यह माना जा रहा हो कि मौजूदा दौर में महिलाएं तेजी से तरक्की कर रही हैं, वह अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं, हर क्षेत्र में वह पुरुषों के संग कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं, तभी देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं जो न केवल इन दावों पर सवालिया निशान लगा देती हैं, बल्कि सच्चाई की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है जो हर आदमी के रोंगटे खड़े कर देती है। यह घटनाएं मौजूदा समाज में महिलाओं की हालत के बारे में सोचने केलिए विवश कर देती हैं। यह घटनाएं बताती हैं कि कैसे हर कदम पर महिलाएं धोखे और अत्याचार का शिकार होती हैं। कैसे उनके अस्तित्व से खिलवाड़ किया जा रहा है और उनकी अस्मिता को रौंदा जा रहा है?
पहली घटना राजस्थान के दौसा जिले से है। यहां तीन निजी अस्पतालों ने मोटी कमाई के चक्कर में पिछले वर्ष २२६ महिलाओं का गर्भाशय ही निकाल दिया। एक गैरसरकारी संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की ओर से दाखिल आरटीआई आवेदन में यह खुलासा हुआ है। पंचायत के महासचिव दुर्गाप्रसाद ने दावा किया है कि अस्पतालों ने इसके लिए हर मरीज से नकदी भी वसूली। ये अस्पताल सरकारी स्कीम ‘जननी सुरक्षा योजना’ के तहत प्रसव कराने के लिए मान्यता प्राप्त हैं। जिला प्रशासन ने जांच के लिए दौसा की सीएमओ ओपी मीणा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इतनी बड़ी संख्या में गर्भाशय तब निकाले गए जब इनकी जरूरत नहीं थी। अस्पताल की ओर से मरीजों को डराया गया कि अगर गर्भाशय नहीं निकाला गया तो मरीज के शरीर में इनफेक्शन फैलने का खतरा है।
दूसरी घटना, गाजियाबाद जिले केमोदीनगर इलाके के सीकरी खुर्द में हुई। यहां शनिवार को एक व्यक्ति ने इज्जत की खातिर एमबीए की पढ़ाई कर रही अपनी बेटी का गला घोटने के बाद शव को फांसी के फंदे पर लटका दिया और खुद कोतवाली में पहुंचकर समर्पण कर दिया। पिता में बेटी के प्रति नफरत की वजह यह थी कि उसके दूसरे संप्रदाय के युवक से प्रेम संबंध थे। आरोपी के बेटे ने पिता पर बहन की हत्या करने का आरोप लगाते हुए घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
तीसरी घटना, बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ थाना क्षेत्र के दतौली गांव की है। यहां भूमि विवाद के चलते बदचलनी का आरोप लगाकर जेठ व चचेरे ससुर ने एक महिला को पेड़ से बांधकर निर्ममता से पिटाई की। मां को बचाने आयी १४ वर्षीय पुत्री की भी जमकर धुनाई कर दी। तमाशबीन बने ग्रामीणों की मौजूदगी में करीब तीन घंटे तक अत्याचार का सिलसिला चला। बाद में पुलिस ने महिला को दबंगों के चंगुल से मुक्त कराया और दो लोगों को गिरफ्तार किया।
चौथी घटना, अलीगढ़ की है। यहां-समस्या दो समाधान लो-जैसे कार्ड, पंफलेट छपवाकर एक कथित तांत्रिक ने दर्जनभर से अधिक महिलाओं के लाखों के जेवर ठग लिए। बन्नादेवी के रघुवीरपुरी (मसूदाबाद बस स्टैंड वाली गली) स्थित मार्केट में हुई इस घटना के बाद महिलाओं ने हंगामा शुरू किया तो पुलिस ने तांत्रिक की रिसेप्शनिस्ट को हिरासत में ले लिया है।
( फोटो गूगल सर्च से साभार )

12 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता!

ana said...

aapne sahii kaha ...mahilaaon ki sthiti me abhi tak koi kargar sudhar nahi ho paya hai .......jwalant mudda

वन्दना अवस्थी दुबे said...

कई सवाल उठाती सार्थक पोस्ट. आभार.

मीनाक्षी said...

यकीन नहीं होता कि इंसान का एक यह भी रूप है जिसमें छिपा दानव ज़्यादा ताकतवर है..

rajputkuldeep.goad said...

Har Inshan Ki soch Alg - Alg Hoti h, Shbi Inshan Ek Se nhi hote h, Vo to koi Raksh Prvarti ka hota h jo mahilaon par Atyachar krta h, Vese to hindu Smaz me Nari ko laxmi ka roop mante h, hum to mahilaon ko laxmi ke sman mante h,,,,,,,,,,,,,
Kuldeep Singh

nivedita said...

इस प्रकार के धोखे और अत्याचार का कारण समाज में व्याप्त अशिक्षा है !

Prarthana gupta said...

stithi ko samjhne aur samjhane ke liye shukariya....

Ragini said...

jab se hosh sambhala hai;tab se ye jwalantt mudda hai..........aakhir kab tak rahega? kash aapki lekhni sab padhe aur samjhe ki "JANNI" ke sath yeh atyachar samaj ko kis disha ki or le jaayega...........

tarkvaageesh said...

http://navkislaya.blogspot.com/


काफ़ी अच्छा लिखा है

प्रवीण कुमार दुबे said...

पूर्वाजो की देन है सब और क्या

Vidya Shankar said...

Sir, i am posting this material on my website so that more people read and wake up....
allow me please...

Gayathri Nair said...

we have to wake up and save our country from destroying it and sir whatever you have written wish could reach the hearts of all indian citizens.