Wednesday, September 17, 2008

महिला संबंधी अपराधों के लिए जिम्मेदार केौन

े वैश्वीकरण से बदले परिदृश्य और आधुनिकता ी बयार ने महिलाओं ी महत्वाांक्षाओं और सपने में नए रंग भर दिए हैं । इसीलिए आज महिलाएं घर ी दहलीज से निर जिंदगी े रंगमंच पर विविध क्षेत्रों में प्रभावशाली भूमिा निभा रही हैं । रोजगार ोई क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है जहां महिलाएं अपना योगदान न दे रही हो ं। ल्पना चावला, इंदिरा नूई, सानिया मिर्जा जैसी अने प्रतिभाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनार देश ा नाम रोशन िया है। लेिन इस सबे बावजूद देश में महिलाओं े साथ ऐसी घटनाएं होती हैं जो उने आत्मविश्वास मजोर र देती हैं ।
पूरे देश में महिला संबंधी अपराधों ी स्थिति बडी चिंताजन है । छेडछाड़, बलात्ार, अपहरण, दहेज उत्पीडऩ, घरेलू हिंसा और तस्री ी बढती घटनाएं महिला जीवन ी त्रासदी ो उजागर रती हैं। इन अपराधों ारण बडी संख्या में महिलाओं ो शर्मना स्थितियों ा सामना रना पडता है। इन घटनाओं ारण ई बार महिलाएं अपनी प्रतिभा ा देश और समाज े लिए पूर्ण योगदान नहीं दे पाती हैं।
नेशनल ्राइम रेार्ड ब्यूरो े अनुसार वर्ष २००६ में बलात्ार ी १९३४८, महिलाओं और लडियों े अपहरण ी १७४१४, यौन उत्पीडऩ ी ९९६६ तथा पति और परिजनों ्रूरता का े शिार होने ी ६३१२८ मामलों की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज ी गईं। देश ी राजधानी दिल्ली में ही जनवरी से अप्रैल २००८ े मध्य बलात्ार े १२१ मामले प्राश में आए । वर्ष १९७१ में बलात्ार के २४८७ मामलेे दर्ज िए गए थे । वर्ष २००६ त इनमें ६७८ प्रतिशत ी वृद्धि हो गई । महिला अस्मिता से खिलवाड़ ी ये लगातार बढ़रही घटनाएं देश और समाज के लिए बेहद शर्मना हैं । बड़ी संख्या में महिलाओं से छेडछाड ी घटनाएं होती हैं जिनमें से अनेक ी तो पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज नहीं होती है। स्कूल और ार्यस्थलों पर जाती अने लडियों और महिलाओं ो मनचलों ी अभद्र टिप्पणियों ा शिार होना पडता है। विरोध रने पर उने ऊपर तेजाब डालने जैसी घटनाएं भी हुई हैं । ऐसे में सहज ही यह सवाल उठता है ि इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ौन है? इन घटनाओं ैसे रोा जाए?
वास्तव में िसी भी समाज ा विास नारी शक्ति े सहयोग े बिना संभव नहीं है । इसे लिए जरूरी है ि उन्हें निर्भी होर सम्मानसहित जीवनयापन े अवसर मिलें । आज जरूरी है ि लडियों ो पढाई े साथ ही ैरियर बनाने े लिए अच्छा माहौल मिले । जीवनसाथी चुनने ी आजादी मिले । सडों पर वह बेखौफ गुजर सकें । विास े लिए सुरक्षित सामाजि परिवेश होना आवश्य है। दहशत े बीच तरक्े सपनों में रंग नहीं भरे जा सते हैं । इसलिए पुलिस ो महिला संबंधी घटनाओं पर सख्ती से अंुश लगाना होगा । जनसाधारण ो इसमें सहयोग देना होगा। सम्मान से जीना हर लडा अधिार है लेकिन इसे साथ ही उन्हें अपनी वेशभूषा, हावभाव और रहन सहन पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए । उनमें संस्ारों ी झल दिखाई दे, संस्ारहीनता से उपजी मानसिता नहीं । साथ ही असामाजि तत्वों से निपटने े लिए प्रशिक्षण भी पाना चाहिए । ऐसा होने पर ही महिलाएं अपने सपनों ो पूरा र पाएंगी ।

4 comments:

सचिन मिश्रा said...

jab tack logo ki mansikta nahi badalegi,tab tack abradh kam nahi hogein.

Udan Tashtari said...

अच्छा विश्लेषण एवं विचारणीय आलेख.

फ़िरदौस ख़ान said...

बेशक पुरूष प्रधान मानसिकता...ऐसी महिलाओं की भी कमी नहीं...जो इस मानसिकता को बनाए रखने में यकीन करती हैं...

parul said...

very nice sir